|
|
| |
| |
| विद्यालय गान |
|
रचयिता -
आर. आर. पाण्डेय
पूर्व वरिष्ठ अध्यापक |
हम सैनिक स्कूल के।
झुकी डाल के फूल से।। |
|
|
| |
|
खिलते जायें, महकते जायें।
हम सैनिक स्कूल के।
झुकी डाल के फूल से।।
खिलते जायें, महकते जायें।
हम सैनिक स्कूल के।
|
रीवा, चित्रकूट की गरिमा, साँची की गम्भीरता।
मध्य-देश, क्षिप्रा की महिमा, वीर भरत की वीरता।।
अभिमन्यु की शान, कालिदास का ज्ञान।
पढ़ते जायें, समझते जायें।।
हम सैनिक स्कूल के।
झुकी डाल के फूल से।।
खिलते जायें, महकते जायें।
हम सैनिक स्कूल के।। |
|
|
| |
|
विन्ध्य, सतपुड़ा की छाया में, चम्बल की घाटी।
कल-कल करती धार नर्मदा, वीर बेतवा की माटी।।
गौरवमय आख्यान, उन्नति का अभियान
पढ़ते जायें, समझते जायें।
हम सैनिक स्कूल के।
झुकी डाल के फूल से।।
खिलते जायें, महकते जायें।
हम सैनिक स्कूल के। |
ध्रुव की अटल प्रतिज्ञा मन में, एकलव्य-सी गुरुभक्ती।
कर्म-परायण लव-कुश जैसे, योग-साधना की शक्ती।।
देश-भक्ति का ज्ञान, लक्ष्य भेद पर ध्यान।
धरते जायें, विचरते जायें।।
हम सैनिक स्कूल के।
झुकी डाल के फूल से।।
खिलते जायें, महकते जायें।
हम सैनिक स्कूल के।। |
|
|
| |
|
जीवन सदा-संयमित सुन्दर, अनुशासन का मंत्र है।
साधन-शिक्षा के प्रभूत हैं, भाँति-भाँति के यंत्र हैं।।
श्वेत-शेर की शान, ऊँचे हैं अरमान।
चलते जायें, मचलते जायें।।
हम सैनिक स्कूल के।
झुकी डाल के फूल से।।
खिलते जायें, महकते जायें।
हम सैनिक स्कूल के। |
– :O: – |
|
| |
|
|
|
|
|